कड़ी सुरक्षा के बीच खुला जगन्नाथ मंदिर का खजाना, जानिए 46 साल से बंद खजाने की पूरी कहानी

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46 साल के लंबे इंतजार के बाद जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) में स्थित रत्न भंडार का दरवाजा खुल चुका (door to the jewel store has opened) है। पिछले 6 साल से इस दरवाजे की चाबी गायब थी। साल 2018 में ओडिशा हाईकोर्ट Orissa High Court() ने खजाने की जांच-पड़ताल करने के लिए रत्न भंडार खोलने का आदेश दिया था। मगर चाबी ना होने के कारण रत्न भंडार का गेट नहीं खुल सका था। वहीं अब कड़ी सुरक्षा के बीच जगन्नाथ मंदिर का ये रहस्यमयी दरवाजा (mysterious door of Jagannath temple) खुल गया है।

रत्न भंडार को खोलते समय मंदिर परिसर में भारी संख्या में पुलिस तैनात थी। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार दो सांप रत्न भंडार की सुरक्षा करते हैं। ऐसे में रत्न भंडार खोलने से पहले सपेरों को भी बुलाया गया था। कहा जाता है कि इस रत्न भंडार में भगवान जगन्नाथ के बेशकीमती आभूषण मौजूद हैं। हालांकि कुल खजाने का आंकड़ा अभी तक सामने नहीं आया है। बता दें कि आज दोपहर 1:28 मिनट पर रत्न भंडार के दरवाजे खोले गए हैं। इस दौरान मंदिर के बाहर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली हैं।

खजाने में वो चीजें हैं, जो उस दौर के राजाओं और भक्तों ने मंदिर में चढ़ाए थे। 12वीं सदी के बने मंदिर में तब से ये चीजें रखी हुई हैं। इस भंडारघर के दो हिस्से हैं, एक बाहरी और एक भीतरी भंडार। खजाने के बाहरी हिस्से को समय-समय पर खोला जाता है। त्योहार या अन्य किसी भी मौके पर खोलकर गहने निकालकर भगवान को सजाया जाता है। रथ यात्रा के समय ये होता ही है. रत्न भंडार का अंदरूनी चैंबर पिछले 46 साल से बंद है। आखिरी बार इसे साल 1978 में खोला गया था। वहीं साल 1985 में भी इन चैंबर को खोला गया, लेकिन इसका मकसद क्या था और भीतर क्या-क्या है, इस बारे में कहीं कुछ नहीं बताया गया।

साल 2018 में विधानसभा में पूर्व कानून मंत्री प्रताप जेना ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि आखिरी बार यानी 1978 में इसे खोलने के समय रत्न भंडार में करीब साढ़े 12 हजार भरी (एक भरी 11.66 ग्राम के बराबर होता है) सोने के गहने थे, जिनमें कीमती पत्थर जड़े हुए थे। साथ ही 22 हजार भरी से कुछ ज्यादा के चांदी के बर्तन थे। साथ ही बहुत से और गहने थे, जिनका तब वजन नहीं किया गया था।

साल 2018 में ओडिशा हाईकोर्ट ने सरकार को निरीक्षण के लिए मंदिर का ये कक्ष खोलने का निर्देश दिया था। हालांकि चैंबर की चाबियां नहीं मिल सकी थीं, जिससे पूरे राज्य में नाराजगी देखने को मिली थी। बीते लोकसभा चुनाव में रत्न भंडार (खजाना कक्ष) की गुम हुईं चाबियों का मुद्दा उठा था। जगन्‍नाथ मंदिर के रत्‍न भंडार को लेकर ओडिशा के लोगों में गहरी आस्था है। जगन्नाथ मंदिर के तहखाने में रत्न भंडार स्थित है। रत्न भंडार में सदियों से भक्तों और पूर्व राजाओं द्वारा दान में दिए गए बहुमूल्य आभूषण रखे हुए हैं। इसे आखिरी बार 14 जुलाई 1985 को खोला गया था।

जानकारी के मुताबिक, यह साल 2018 था। ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर के बाहर जमा भीड़ से सोलह लोग अंधेरी गुप्त गली में प्रवेश कर गए। उनके हाथों में टॉर्च और दिल में उत्सुकता थी। भुवनेश्वर से विशेष बचाव कर्मी और सांप पकड़ने वाली टीम बाहर मुस्तैद थी। 16 लोगों की टीम लंबे अंतराल के बाद जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में प्रवेश कर रही थी। हालांकि, यह अभियान ज्यादा दिन नहीं चला। टीम भगवान जगन्नाथ के रत्न भंडार के मुख्य कक्ष में नहीं जा सकी।

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