
वापी के डुंगरा इलाके में श्मशान घाट के पास दमनगंगा नदी के किनारे कई औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले भारी कचरे को डंप करने से प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा है। जिससे पांच लाख से अधिक लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ने की आशंका है,
हजारों ट्रकों से लाखों टन औद्योगिक कचरा ढोने वाली व्यवस्था पर स्थानिक प्रशासन का ध्यान क्यों नहीं जाता? यह एक चर्चा का विषय है वापी सीईटीपी से दमनगंगा नदी में तरल पदार्थ के प्रवाहित होने से आसपास के गांवों और केंद्र शासित प्रदेश में प्रदूषण की समस्या पैदा हो रही थी।
हालांकि, जब सीईटीपी ने अपने डिस्चार्ज पर नियंत्रण कर लिया तो लोगों को इस समस्या से राहत मिली। लेकिन डूंगरा क्षेत्र में दमनगंगा नदी के किनारे औद्योगिक ठोस कचरा फेंके जाने से पांच लाख से अधिक लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

दमनगंगा नदी में हजारों ट्रकों से डाला गया लाखों टन औद्योगिक कचरा चर्चा का विषय बन गया है।
डुंगरा श्मशान घाट के दाहिनी ओर दमनगंगा नदी का तल औद्योगिक ठोस कचरे से भरा जा रहा है। ये ठोस अपशिष्ट प्रदूषित हैं या नहीं इसकी पुष्टि के लिए इसके नमूने लेकर जीपीसीबी से जांच कराना जरूरी है।
5 साल पहले सर्वेक्षण में दी गई थी चेतावनी 2018 में नीरी नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट द्वारा किए गए सर्वेक्षण में दमनगंगा में दादरा नगर हवेली के उद्योगों का एन्फ्लूएंट और सोसायटी के सीवेज के कारण दमनगंगा नदी में 50 मीट्रिक टन पोल्युशन लोड होने की चेतावनी दी गई थी।
और वापी शहर की दमनगंगा नदी का पानी वापी शहर के करीब 2.5 लाख, वापी जीआईडीसी के लगभग 50,000 और वापी तालुका के 2 लाख कुल मिलाकर पांच लाख लोग इस पानी का उपयोग पीने के लिए करते हैं।

ऐसे में औद्योगिक कचरे को मनो पूर्व नियोजित रूप से नदी के तल में डंप किया जा रहा है। इससे नदी का पानी और अधिक प्रदूषित होने का खतरा बढ़ सकता है।
