तुर्की के राष्ट्रपति एर्गोदन की इजरायल को धमकी में कितना दम

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तुर्की (Turkish) के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन (President Recep Tayyip Erdogan) ने 28 जुलाई को अपने गृहनगर राइज में बोलते हुए इजरायल (Israel) पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हमें बहुत मजबूत रहना चाहिए ताकि इजरायल फिलिस्तीन (Palestine) के साथ ज्यादती ना कर सके। जो हमने काराबाख और लीबिया (Karabakh and Libya) में एंट्री करके किया, हम उनके साथ भी कर सकते हैं। तुर्की के राष्ट्रपति ने साफतौर ये नहीं बताया कि वे किस तरह के हस्तक्षेप की बात कर रहे हैं लेकिन साफ है कि वह इजरायल के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर (Proxy War) का इशारा कर रहे थे। एर्दोगन के बयान ने इसलिए भी दुनिया का ध्यान खींचा क्योंकि तुर्की ने हालिया वर्षों में काराबाख और लीबिया में मजबूत हस्तक्षेप किए हैं।

यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट कहती है कि तुर्की के राष्ट्रपति ने अपने भाषण में लीबिया और नागोर्नो-करबाख का नाम लेकर आर्मीनिया का जिक्र किया। तुर्की के राष्ट्रपति ने जिन दो संघर्षों में हस्तक्षेप का जिक्र किया है, उनसे समझा जा सकता है कि वह इजरायल के खिलाफ किस तरह की लड़ाई की बात कर रहे हैं। लीबिया और कराबाख में तुर्की के हस्तक्षेप में नॉनस्टेट बॉडी और प्रॉक्सी लड़ाकों की अहम भूमिका थी। ऐसे में तुर्की ने यही फिलिस्तीन में किया तो वह इजरायल के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं।

एक फर्म की मदद से तुर्की ने की लड़ाकों की भर्ती
रिपोर्ट में बताया गया है कि लीबिया और कराबाख में प्रॉक्सी लड़ाकों की भर्ती और तैनाती तुर्की सरकार के अनुबंध के तहत तुर्की की निजी सिक्योरिटी फर्म सादात ने मैनेज की थी। सादात (SADAT) इंटरनेशनल डिफेंस कंसल्टिंग कंपनी की स्थापना 2012 में तुर्की में एकमात्र निजी स्वामित्व वाली रक्षा परामर्श फर्म के रूप में की गई थी। कंपनी की स्थापना ब्रिगेडियर जनरल (सेवानिवृत्त) अदनान तनरिवर्दी ने की थी। तनरिवर्दी और एर्दोगान 1994 से एक-दूसरे को जानते हैं। 2016 में तनरिवर्दी को एर्दोगान के शीर्ष सैन्य सलाहकार के रूप में नामित किया गया था। इसके बाद उन्होंने सेना में व्यापक बदलाव आए। उन्होंने धर्मनिरपेक्ष सैन्य अकादमियों को बंद करके राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय बनाया। संस्थान ने धार्मिक इमाम हातिप स्कूलों से छात्रों की भर्ती की।

लीबिया में सादात ने तुर्की के साथ गठबंधन करने वाले सीरियाई विद्रोही लड़ाकों में से भर्ती की। सीरियाई लड़ाकों की तैनाती में सादात ने फिलिस्तीनी इस्लामिस्ट, फावजी बौकातिफ के साथ मिलकर काम किया। अगस्त, 2020 को अमेरिकी महानिरीक्षक कार्यालय को प्रस्तुत अमेरिकी सेना के अफ्रीका कमांड की एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 5,000 सीरियाई लीबिया में लड़े। इसी तरह नागोर्नो-करबाख में आधिकारिक तुर्की सशस्त्र बलों के सहयोग से सादात ने सीरियाई लड़ाकों की भर्ती और तैनाती की थी।

सादात की इजरायल में दिलचस्पी
सदात की इजरायल में गहरी दिलचस्पी है। तनरिवर्दी ने 2019 में मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट में कहा था कि इस्लामिक दुनिया को फिलिस्तीन के लिए एक सेना तैयार करनी चाहिए। इजरायल को पता होना चाहिए कि अगर वह फिलिस्तीन पर बमबारी करता है, तो तेल अवीव पर भी बम गिरेगा। 7 अक्टूबर के हमलों के बाद सादात द्वारा संचालित एक थिंक टैंक ने हमास के समर्थन में बयान जारी किया। बयान में इजरायल से मुकाबले के लिए इस्लामिक सेना के गठन का प्रस्ताव रखा गया।

इस पूरे परिपेक्ष्य से समझा जा सकता है कि राष्ट्रपति एर्दोगन ने संकेत दिया है कि तुर्की के के छद्म युद्ध के तरीकों को इजरायल-फिलिस्तीनी संदर्भ में भी लागू किया जा सकता है। एर्दोगन लगातार इजरायल के लिए कड़ी बयानबाजी करते रहे हैं लेकिन इस बार कहा जा रहा है उनको खारिज करना गलत होगा। कहा जा सकता है कि तुर्की के राष्ट्रपति सादात की मदद से फिलीस्तीन में हमास की बड़ी मदद सकते हैं।

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