1600 साल पुरानी नालंदा यूनिवर्सिटी के नए कैंपस का PM मोदी आज करेंगे उद्घाटन, जानें- क्या होगा खास?

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi)  आज बिहार (Bihar) के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University) के नये परिसर का उद्घाटन (Inaugration) करने जा रहे हैं. कैंपस के उद्घाटन के लिए आयोजित किए जा रहे कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) और 17 देशों के राजदूत शामिल होंगे. साल 2016 में, नालंदा के खंडहरों को संयुक्त राष्ट्र (UN) विरासत स्थल घोषित किया गया था, इसके बाद विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य 2017 में शुरू किया गया. आइए जानते हैं इस विश्विविद्यालय का इतिहास और नये कैंपस में क्या है खास.

बेहद पुराना है नालंदा यूनिवर्सिटी का इतिहास

इस विश्वविद्यालय का इतिहास काफी पुराना है. लगभग 1600 साल पहले नालंदा यूनिवर्सिटी की स्थापना पांचवी सदी में हुई थी. जब देश में नालंदा यूनिवर्सिटी बनाई गई तो दुनियाभर के छात्रों के लिए यह आर्कषण का केंद्र था. विशेषज्ञों के अनुसार, 12वीं शताब्दी में आक्रमणकारियों ने इस विश्वविद्यालयों को नष्ट कर दिया था. इससे पहले करीबन 800 सालों तक इन प्राचीन विद्यालय ने ना जाने कितने छात्रों को शिक्षा दी है. इसकी नींव गुप्त राजवंश के कुमार गुप्त प्रथम ने रखी थी. पांचवीं सदी में बने प्राचीन विश्वविद्यालय में करीब 10 हजार छात्र पढ़ते थे, जिनके लिए 1500 अध्यापक हुआ करते थे. छात्रों में अधिकांश एशियाई देशों चीन, कोरिया और जापान से आने वाले बौद्ध भिक्षु होते थे. इतिहासकारों के मुताबिक, चीनी भिक्षु ह्वेनसांग ने भी सातवीं सदी में नालंदा में शिक्षा ग्रहण की थी. उन्होंने अपनी किताबों में नालंदा विश्वविद्यालय की भव्यता का जिक्र किया है. यह बौद्ध के दो सबसे अहम केंद्रों में से एक था. यह ज्ञान और बुद्धिमत्ता के प्रसार की दिशा में प्राचीन भारत के योगदान का गवाह है.

कहां है विश्वविद्यालय का नया कैंपस

विश्वविद्यालय का नया कैंपस नालंदा के प्राचीन खंडहरों के स्थल के पास बनाया गया है. इस नये कैंपस की स्थापना नालंदा विश्वविद्यालय अधिनियम, 2010 के माध्यम से की गई है. इस अधिनियम में स्थापना के लिए 2007 में फिलीपींस में आयोजित दूसरे पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में लिए गए निर्णय को लागू करने का प्रावधान किया गया था.

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विदेशी छात्रों के लिए 137 स्कॉलरशिप

नालंदा विश्वविद्यालय में भारत के अलावा 17 अन्य देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, चीन, इंडोनेशिया, लाओस, मॉरीशस, म्यांमार, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, थाईलैंड और वियतनाम की भागीदारी है. इन देशों ने विश्वविद्यालय के समर्थन में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके अलावा आने वाले सेशन में पीएचडी कोर्स के लिए कई देशों के छात्रों ने अपना आवेदन दिया है. नालंदा विश्वविद्यालय की तरफ से इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए 137 स्कॉलरशिप रखी गई हैं. विश्वविद्यालय में बौद्ध अध्ययन, फिलॉसफी, तुलनात्मक धर्म की पढ़ाई, इतिहास, पारिस्थितिकी और पर्यावरण स्टडीज और मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए अलग-अलग स्कूल बनाए गए हैं.

खास है नालंदा यूनिवर्सिटी का नया कैंपस

नालंदा यूनिवर्सिटी में दो अकेडमिक ब्लॉक हैं, जिनमें 40 क्लासरूम हैं. यहां पर कुल 1900 बच्चों के बैठने की व्यवस्था है. यूनिवर्सिटी में दो ऑडिटोरयम भी हैं जिसमें 300 सीटे हैं. इसके अलावा इंटरनेशनल सेंटर और एम्फीथिएटर भी बनाया गया है, जहां 2 हजार लोगों के बैठने की क्षमता है. यही नहीं, छात्रों के लिए फैकल्टी क्लब और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स सहित कई अन्य सुविधाए भी हैं.

नालंदा यूनिवर्सिटी का कैंपस ‘NET ZERO’ कैंपस हैं, इसका मतलब है कि यहां पर्यावरण अनुकूल के एक्टिविटी और शिक्षा होती है. कैंपस में पानी को रि-साइकल करने के लिए प्लांट लगाया गया है, 100 एकड़ की वॉटर बॉडीज के साथ-साथ कई सुविधाएं पर्यावरण के अनुकूल हैं.

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