
पश्चिम बंगाल में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक प्रशिक्षु महिला डॉक्टर की हत्या के मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान ने एक नया बवाल खड़ा कर दिया। दरअसल, आरजी कर मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में प्रदर्शन के बीच ही कुछ अज्ञात प्रदर्शनकारियों ने इमरजेंसी वॉर्ड में घुसकर तोड़फोड़ किया। इस तोड़फोड़ में तृणमूल कांग्रेस के गुंडों का हाथ बताया जा रहा है। इस बीच सीएम ममता बनर्जी ने इस तोड़फोड़ के लिए वाम दल औक राम को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वाम दल पश्चिम बंगाल में अशांति फैलाने के लिए राम का साथ दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री के इस बयान पर केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हत्या और दुष्कर्म को छिपाने के लिए सीएम ऐसे बयान दे रही हैं। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने ममता बनर्जी के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी बिलकुल गलत हैं। यह सब टीएमसी का षड़यंत्र है। वह इस जघन्य अपराध को छिपाने के लिए ऐसे बयान दे रही हैं।”
सीएम ममता बनर्जी के बयान पर भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी को बंगाल के लोगों ने नकार दिया है। उन्हें मालूम है कि लोग उनके खिलाफ खड़े हैं। जब बंगाल की महिलाएं सीएम से इस्तीफा मांग रही हैं तो वह जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही हैं। उनकी राजनीतिक रणनीति में सबसे दुखद बात यह है कि यह केवल एक वोट बैंक की राजनीति बनकर रह गई। लगातार पूरा देश उनसे पूछ रहा कि उनके मन में हिंदुओं के लिए नफरत क्यों है? आज लोगों को यह समझ आ रहा है कि राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव को जोड़ने वाली चीज का आधार हिंदू नफरत है”
ममता बनर्जी ने कहा कि भीड़ छात्र आंदोलन से जुड़ी नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी भाजपा के लोग हैं, जिन्होंने अस्पताल के इमरजेंसी वॉर्ड में तोड़फोड़ की। उन्होंने कहा, “आरजी कर अस्पताल में जिन लोगों ने तोड़फोड़ की, वे सभी छात्र आंदोलन में शामिल नहीं थे। वे सभी बाहर वाले थे। मैंने कई वीडियो में देखा। मेरे पास तीन वीडियो हैं और मैं देख सकती हूं कि कुछ लोग राष्ट्र ध्वज लेकर हैं। वे भाजपा के लोग हैं।”
सीएम ममता बनर्जी ने घटना के दौरान संयम बरतने के लिए पुलिस की भी सराहना की। उन्होंने कहा, “कल पुलिस पर हमला हुआ, उनमें से एक उपायुक्त (डीसी) था जो सुरक्षा उद्देश्यों के लिए वहां मौजूद था, और दो प्रभारी अधिकारी (ओसी) थे। एक घंटे तक वे लापता थे और जब उन्हें ढूंढा गया तब वे बेहोश पाए गए। उनसे सिर से खून बह रहा था। मैंने पुलिस को सुबह के तीन बजे इसकी जानकारी दी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। मैं उन्हें शुभकामनाएं देना चाहती हूं कि उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया।”
उन्होंने आगे कहा, “अब यह मामला हमारे हाथ में नहीं है, यह अब सीबीआई के पास जा चुका है। इससे हमें कोई दिक्कत नहीं।” महिला प्रशिक्षु डॉक्टर की हत्या के मामले में उन्होंने कहा कि इसकी एकमात्र सजा मृत्युदंड है।