पश्चिम बंगाल : ममता सरकार का बड़ा ऐक्शन, छात्रों के विरोध के बाद प्रिंसिपल सहित 3 अधिकारी बर्खास्त

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कोलकाता (Kolkata) के आरजी कर मेडिकल कॉलेज (RG Kar Medical College) में महिला डॉक्टर (female doctor) के रेप और हत्या के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच स्वास्थ्य विभाग (Health Department) ने बुधवार को कॉलेज के चार अधिकारियों हटा दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में नियुक्त की गईं प्रिंसिपल, सुपरिटेंडेंट, एडिशनल सुपरिटेंडेंट और चेस्ट डिपार्टमेंट के एचओडी का ट्रांसफर कर दिया है। अस्पताल के ये अधिकारी हटाए जाएं, इसे लेकर रेप-मर्डर केस में प्रोटेस्ट कर रहे आंदोलनकारी मांग कर रहे थे।

आनंद बाजार पत्रिका की रिपोर्ट की मानें तो आंदोलनकारियों ने बुधवार को सीजीओ कॉम्प्लेक्स से स्वास्थ्य भवन की ओर मार्च किया और एक प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य विभाग में एक ज्ञापन भी प्रस्तुत किया। आंदोलनकारियों की मांग थी कि वर्तमान प्रिंसिपल सुरहिता पाल और सुपरिटेंडेंट बुलबुल मुखर्जी को पद से हटाया जाए। स्वास्थ्य विभाग ने आंदोलनकारियों की इस मांग को मानते हुए चार अधिकारियों की बदली का निर्णय लिया।

विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए सौरभ गांगुली
कोलकाता में विरोध प्रदर्शन बुधवार को भी जारी रहा। इस मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस विरोध प्रदर्शन में दिग्गज क्रिकेटर और भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली भी शामिल हो गए हैं। सौरभ गांगुली पूरे परिवार के साथ बुधवार को प्रोटेस्ट मार्च के बाद चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने वहां मोमबत्तियां जलाकर अपना विरोध जाहिर किया।

इस सिलसिले में सौरभ गांगुली की पत्नी डोना गांगुली ने संवाददाताओं से कहा, “हम रेप के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। हमें एक सुरक्षित समाज की जरूरत है। रेप को रोकना होगा।” उन्होंने मामले की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि यह केवल एक घटना नहीं है बल्कि समाज की सुरक्षा के लिए एक गंभीर मामला है। सौरभ की बेटी सना गांगुली ने भी इस अवसर पर बात की और कहा, “हमें न्याय चाहिए, यह सब रुकना चाहिए। हर दिन हमें बलात्कार की कोई न कोई खबर सुनने को मिलती है और यह दुखद है कि 2024 में भी यह सब हो रहा है।”

बुधवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) द्वारा आयोजित डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन का दसवां दिन रहा। इसके चलते पश्चिम बंगाल में जन स्वास्थ्य सेवा बुरी तरह प्रभावित रही। हालांकि, मामले में कोई नई गिरफ्तारी नहीं हुई लेकिन सीबीआई ने आरजी कर अस्पताल के शीर्ष अधिकारियों से पूछताछ जारी रखी। इस बीच अस्पताल के एक पूर्व प्रशासक ने उच्च न्यायालय का रुख किया और अस्पताल के पूर्व प्राचार्य के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं की प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराने का अनुरोध किया।

प्रिंसिपल को हटाने के लिए हुआ था विरोध
राज्य के मेडिकल कॉलेजों के वरिष्ठ डॉक्टर, नर्स और भविष्य में बनने वालों डॉक्टरों ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय ‘स्वास्थ्य भवन’ तक मार्च निकाला और परिसर को घेर लिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों ने विभाग के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की और दोपहर को ज्ञापन सौंपा। एक जूनियर डॉक्टर ने कहा, ‘‘हमारी नवनियुक्त प्रचार्या डॉ. सुरहिता पाल लापता हैं। वह हमारी संरक्षक हैं, लेकिन जिस रात अस्पताल में तोड़फोड़ की गई, तब से वे परिसर में नहीं आई हैं। हमने सुना है कि वे स्वास्थ्य भवन से काम कर रही हैं। इसलिए हम उन्हें ढूढने के लिए वहां जा रहे हैं।’’ बैठक से बाहर आकर, प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने कहा कि वे अधिकारियों के रवैये से बेहद निराश हैं।

एक डॉक्टर ने कहा, ‘‘हम यहां न्याय मांगने नहीं आए हैं। हम यहां सरकार से यह कहने आए हैं कि उसे उन सभी अस्पताल अधिकारियों को तुरंत हटा देना चाहिए जो उस अपराध की रात प्रशासन के प्रभारी थे और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे फिर कभी प्रशासनिक पदों पर काम न करें। लेकिन स्वास्थ्य अधिकारी ऐसा नहीं कर पाए।’’

जांच के लिए पूर्व प्रिंसिपल को सीबीआई ने बुलाया
इस बीच, सीबीआई ने आरजी कर अस्पताल के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष से लगातार छठे दिन पूछताछ की। एजेंसी के अधिकारियों ने अस्पताल के कई अन्य शीर्ष अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया है, जिसमें अस्पताल की वर्तमान अधीक्षक एवं उप-प्राचार्य बुलबुल मुखोपाध्याय भी शामिल हैं। मुखोपाध्याय पहले छात्र मामलों की डीन के रूप में काम कर चुकी हैं। सूत्रों ने बताया कि एजेंसी द्वारा बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय को अपनी जांच प्रगति रिपोर्ट सौंपने से एक दिन पहले, जांचकर्ता घोष के बयानों में पाई गई कई विसंगतियों की जांच करने की कोशिश कर रहे हैं।

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