जमीन के बदले नौकरी घोटाला केस में लालू के सहयोगी को बेल, हाईकोर्ट ने दिया ये तर्क

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नई दिल्‍ली (New Delhi) । दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने बुधवार को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के करीबी अमित कत्याल (Amit Katial) को चिकित्सा आधार पर छह सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी। वे भारतीय रेलवे के कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी हैं और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें 11 नवंबर, 2023 को मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट (PMLA) के विभिन्न प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था।

अदालत में अंतरिम जमानत याचिका लगाते हुए कत्याल ने तर्क दिया कि बैरिएट्रिक सर्जरी कराने के बाद उन्हें आगे के उपचार और देखभाल की आवश्यकता है, जो कि तिहाड़ जेल में नहीं मिल सकती।

जिसके बाद अंतरिम जमानत देते हुए जस्टिस धर्मेश शर्मा की अवकाश पीठ ने कहा कि बैरिएट्रिक सर्जरी के बाद उन्हें शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए उचित आहार की अत्यधिक आवश्यकता है, जबकि कत्याल की आहार संबंधी आवश्यकताएं ऐसी हैं कि जिनकी पूर्ति जेल परिसर में नहीं कराई जा सकती।

अदालत ने कहा, ‘आवेदक को जिस स्तर की देखभाल, ध्यान, मिनट-दर-मिनट निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया की आवश्यकता है, वह वर्तमान में जेल में उपलब्ध नहीं कराई जा सकती है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि लंबे समय तक हर दिन घर का बना खाना उपलब्ध कराना जेल परिसर में कई तकनीकी बाधाओं से भरा है।’

जिसके बाद अदालत ने आदेश देते हुए कहा, ‘यह अदालत चिकित्सा आधार पर जेल से रिहाई की तारीख से छह सप्ताह की अवधि के लिए अंतरिम जमानत के लिए आवेदन को स्वीकार करती है।’ अदालत ने कत्याल को 2.5 लाख रुपए की जमानत के साथ एक निजी बॉण्ड प्रस्तुत करने के लिए भी कहा।

कत्याल की अंतरिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए ईडी ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता को पहले लगभग 84 दिनों के लिए चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत दी गई थी और वह हर समय चिकित्सा आधार पर जमानत पर विस्तार की मांग नहीं कर सकता। एजेंसी ने कहा कि अगर किसी विशेष आहार की जरूरत है तो उसे घर के बने खाने के जरिए जेल परिसर में लाया जा सकता है।

हालांकि अदालत ने ईडी के तर्कों को नहीं माना और कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया है और उसे पहले भी लगभग 84 दिनों के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था, लेकिन उस पर जांच को प्रभावित करने का कोई आरोप नहीं लगा है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि कत्याल ने RJD प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद की ओर से रेलवे की नौकरी के इच्छुक कई उम्मीदवारों को नौकरी देने के बदले उनसे जमीन खरीदी थी। ईडी ने दावा किया है कि कत्याल एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के निदेशक थे, जिसने लालू प्रसाद की ओर से उम्मीदवारों से जमीन खरीदी थी। इस मामले में RJD सुप्रीमो लालू यादव के परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी आरोपी हैं।

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