90% ‘अराकू कॉफी’ हो जाती है एक्सपोर्ट, ‘मन की बात’ में PM मोदी ने भी किया जिक्र

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नई दिल्ली: भारत की संस्कृति से लेकर ताजमहल तक और अब अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में योग विज्ञान तक, इन सभी ने विश्व पटल पर देश को नई पहचान दी है. लेकिन अब भारत की बात इस सॉफ्ट पावर से आगे बढ़कर ट्रेड पावर तक पहुंचने को लेकर हो रही है. भारत ने चावल एक एक्सपोर्ट पर बैन लगाया, तो अमेरिका में हाहाकार मच गया. इसी कड़ी में नया नाम जुड़ चुका है ‘अराकू कॉफी’ जिसका जिक्र खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में किया है.

तीसरी बार केंद्र की सत्ता संभालने के बाद पीएम मोदी जब अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को लेकर लौटे, तो उसके साथ भारत की इस ‘ग्लोबल कॉफी’ का जिक्र भी साथ लाए. मानसून के मौसम में पीएम मोदी भी कॉफी की महक का जिक्र करे बिना नहीं रह पाए.

पीएम मोदी ने अपने कार्यक्रम में जानकारी दी कि आंध्र प्रदेश के अराकू वैली में पैदा होने वाली अराकू कॉफी वर्ल्ड फेमस है. पूरी दुनिया में इसकी डिमांड है. करीब 1.5 लाख आदिवासियों की जिंदगी को इस कॉफी ने पूरी तरह बदलकर रख दिया है. इसके अनोखे टेस्ट के बारे भी पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में जिक्र किया, जिसका आनंद उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के साथ लिया था.

बात अगर अराकू कॉफी की की जाए, तो इसकी पैदावार आंध्र प्रदेश में नीलगिरी के पहाड़ी इलाकों में होती है. इसे काली मिर्च की खेती के बीच प्लांटेशन के तौर पर उगाया जाता है. शायद यही वजह है कि इसका स्वाद काफी अनोखा है. अराकू घाटी में कॉफी की पैदावार की शुरुआत के सबूत 1920 तक मिलते हैं.

अराकू कॉफी को सिर्फ उसका स्वाद ही नहीं, बल्कि इसके व्यापार का तरीका भी इसे खास बनाता है. इस कॉफी को छोटे-छोटे प्लॉट्स पर उगाया जाता है. इस पर लगने वाली कॉफी चेरी को अपना पूरा रंग पकने तक पौधे पर ही रहने दिया जाता है. इसकी खेती का यही तरीका इसे 100% अरेबिका कॉफी बनाता है.

इस कॉफी के प्लांटेशन की एक और खास बात ये है कि इसकी पैदावार से लेकर इसके व्यापार तक का काम खुद आदिवासी ही करते हैं. ये एक तरह का को-ऑपरेटिव बिजनेस मॉडल है. इस वजह से कॉफी की छंटाई, पकाई, बिनाई और भुनाई से लेकर इनकी पैकेजिंग और मार्केटिंग तक, किसी में भी मिडिलमैन का दखल नहीं है.

अराकू कॉफी की डिमांड कितनी है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि यहां की सालाना पैदावार का करीब 90% निर्यात हो जाता है. इसकी सबसे ज्यादा मांग स्वीडन में है. वहीं संयुक्त अरब अमीरात, इटली, स्विट्जरलैंड और अन्य देशों में भी इसकी डिमांड बढ़ रही है. इतना ही नहीं पेरिस को भी अब इसका स्वाद चढ़ रहा है. करीब 4 अरब रुपए की अराकू कॉफी का एक्सपोर्ट भारत हर साल कर रहा है.

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