
आज भी ग्रामीण स्तर पर अंधविश्वास को मानने वाले लोगों का एक वर्ग ऐसा है, जो पैसे देने के लिए या वर्ली मटका की संख्या पहले ही जानने के लिए कुछ जानवरों और पक्षियों की आंखों, नाखूनों, स्किन और पंखों पर कुछ तांत्रिक अनुष्ठान करते हैं, जिसके कारण इस प्रकार की वस्तु को अधिक कीमत में बेचा जाता है,
उत्तर वन विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, धरमपुर रेंज के हिरेन पटेल और उनकी टीम को सुचना मिली थी की बिक्री के लिए धरमपुर में एक व्यक्ति दो बड़े उल्लू, जिन्हें इंडियन ओवल भी कहा जाता है, उसे बेचने के लिए आने वाला है,
सूचना के आधार पर फारेस्ट विभाग की टीम गश्त पर थी, उसी समय एक होंडा बाइक जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर जी जे 15 ए एफ 8763 और
टवेरा कार क्रमांक जीजे 21 ए एच 5840 को वन विभाग की टीम ने रोका,
कार में सवार लोग वन विभाग की टीम को देखकर मौके से भाग गये,
जब फारेस्ट की टीम द्वारा टोवेरा की तलाशी ली गई तो कार के पीछे एक पिंजरे में दो उल्लू मिले,
ये दोनों उल्लू बेचने के लिए लाए गए थे,
वन विभाग ने गणेश मोहन महला के खिलाफ शेड्यूल फॉरेस्ट पक्षी को रखने, बेचने और छेड़छाड़ करने के आरोप में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत मामला दर्ज किया है,
गिरफ्तार आरोपी को धर्मपुर न्यायालय में पेश करते हुए माननीय न्यायालय ने आरोपी को ऐसी महीने की 30 तारीख तक का रिमांड का आर्डर किया है,
ज्ञात हो कि धरमपुर में उल्लू बेचने के लिए गणेश महाला सुरगना नामक विस्तार से आया था, जिसे बेचने वालों ने एक उल्लू के लिए उसे 30 लाख रुपये देने की पेशकश की थी,
पैसों के लालच में गणेश महाला उल्लुओं को लेकर धरमपुर में बिक्री के लिए आया था, लेकिन खरीदारों के आने से पहले ही वन विभाग टीम ने उसे उल्लुओं समेत गिरफ्तार कर लिया था।
