यूनोस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल सोनार किले की छत का हिस्सा ढहा, 870 पुराना है लिविंग फोर्ट

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जैसलमेर (Jaisalmer) में यूनोस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट (Unesco World Heritage Site) में शामिल सोनार फोर्ट (Sonar Fort) के एक मकान (House) की छत गुरुवार को गिर गई (roof fell down). गनीमत रही कि माकान खाली था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था. तेज धमाके के साथ छत गिरने से आसपास लोगों कि भारी भीड़ जमा हो गई. जानकारी मिलने पर शहर कोतवाल सवाई सिंह टीम के साथ सोनार दुर्ग पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया.

इस दौरान एएसआई (भारतीय पुरातत्व विभाग) की टीम भी मौके पर पहुंची तथा गली में बेरिकेडिंग लगाकर आवागमन को रुकवाया. गौरतलब है गत 6 अगस्त को इसी सोनार किले के परकोटों की दीवार के ऊपर बुर्ज की दीवार भारी बारिश से गिर गई थी. उस दीवार के पत्थर अभी भी हवा में लटक रहे हैं. पुरातत्व विभाग ने अभी तक उसकी मरम्मत का कार्य व हवा में लटक रहे पत्थरो को नीचे उतरवाने का कार्य शुरू नहीं किया है. हालांकि जिला प्रशासन द्वारा सड़क मार्ग पर बेरिकेडिंग लगाकर रास्ता जरूर बंद कर दिया गया है.

दो दिन पहले भी सोनार फोर्ट के बुर्ज की गिर गई थी दीवार
मिली जानकारी के अनुसार लिविंग सोनार दुर्ग के व्यास पाड़ा में गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे के आसपास खेतपालिया हवेली की छत गिरने की घटना से सभी दहशत में आ गए. 2 दिन पहले सोनार किले की दीवार भी गिर गई थी. अचानक मकान की छत गिरने से यहां के लोगों में आक्रोश फैल गया तथा नगरपरिषद व पुरातत्व विभाग को खरी खोटी सुनाई. लोगों का आरोप है कि पुराने मकानों को हटाने का काम प्रशासन नहीं कर रहा है. इससे पड़ोसी दहशत में हैं.

सोनार दुर्ग के निवासी विमल गोपा ने बताया कि किले में 30 से भी ज्यादा पुराने मकान है. जिनमें लोग नहीं रहते हैं. ऐसे में जर्जर हो चुके मकान बारिश के दिनों में खतरा बन जाते हैं. पड़ोसी दहशत में रहते हैं कि कहीं मकान गिर ना जाए. पुरातत्व विभाग इनको ना तो हटा रहा है और ना ही पुराने मकानों की रिपेयरिंग करने देता है. ऐसे में सभी गुस्से में हैं.

खाली हवेलीनुमा मकान की गिरी छत
जिस समय मकान की छत गिरी उस समय मकान खाली था. विमल गोपा ने बताया कि यह हवेली पहले से ही जर्जर हालत में थी लेकिन इसकी रिपेयरिंग करवाने की परमिशन पुरातत्व विभाग ने नहीं दी. शहर कोतवाल सवाई सिंह ने बताया कि मकान कमल व्यास का बताया जा रहा है. मकान मालिक किले से बाहर ही ढिब्बा पाड़ा में रहते हैं. मकान काफी समय से खाली है. हाल ही में आई बारिश के बाद से मकान कमजोर हो गया था और छत गिर गई.

किले में रहने वाले लोग हैं भयभीत
शहर कोतवाल ने बताया कि एहतियातन जिस गली में मकान गिरा है उसको बेरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया है और वहां पुलिस को नियुक्त किया गया है ताकि कोई अंदर गली में ना जाए. जैसलमेर में भारी बारिश के चलते सोनार किले में स्थित पुराने जर्जर मकानों के गिरने का डर बढ़ गया है. इन मकानों के पास रहने वाले लोगों की रातों की नींद उड़ गई है. उनको डर है कि संकरी गलियों में आए ये मकान कभी भी गिरेंगे तो उनके ही मकान पर गिरेंगे. इससे बड़ा हादसा हो सकता है. ऐसे में सभी ने प्रशासन से इन जर्जर मकानों को हटाने की अपील की है.

870 साल पुराना है ये लिविंग फोर्ट
जैसलमेर का सोनार 870 साल पुराना है. सोनार दुर्ग में नगर परिषद के 2 वार्ड है. शहर की आधी आबादी किले में ही निवास करती है. इसलिए इसे लिविंग फोर्ट भी कहते हैं. सोनार दुर्ग को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में भी शामिल किया गया है। इस किले का संरक्षण भारतीय पुरातत्व विभाग करती है. ऐसे में इस किले में किसी भी तरह के निर्माण आदि पर रोक है.

किले से कई परिवार कर चुके हैं पलायन
किले में निवास करने वाले कई परिवार पलायन कर बाहरी राज्यों में बस चुके हैं. ऐसे में उनके मकान जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं जो अन्य लोगों के लिए खतरे की घंटी बन गए हैं. कई बार जर्जर मकान गिरे हैं और नुकसान हुआ है. नगर परिषद मकान के बाहर नोटिस चिपका देती है, क्योंकि इनके असल मालिक कभी यहां लौटे ही नहीं, ना ही उनकी कोई जानकारी है. ऐसे में कार्रवाई करना भी गैर कानूनी हो जाता है. लेकिन इन सबके बीच इन मकानों के पास रहने वाले लोग बारिश के दिनों में खतरे के साए में जीते हैं.

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